हरिद्वार 05 फरवरी । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार के सप्तऋषि आश्रम मैदान में आयोजित ‘संत सम्मेलन’ में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ब्रह्मगिरी महाराज सनातन संस्कृति और राष्ट्र चेतना के जीवंत प्रतीक थे । जिनका जीवन सेवा, त्याग और करुणा को समर्पित रहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संत-महात्मा और धर्मगुरु समाज को दिशा देने वाले स्तंभ हैं, जो राष्ट्र और संस्कृति के संरक्षण में अमूल्य योगदान देते हैं। ब्रह्मगिरी महाराज ने आध्यात्मिक ज्ञान को सामाजिक सेवा से जोड़ते हुए भारत माता मंदिर की स्थापना की, जो आज भी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का केंद्र है। वर्ष 1998 के कुंभ मेले में आचार्य महामंडलेश्वर बनने के बाद उन्होंने 10 लाख से अधिक नागा साधुओं को दीक्षा प्रदान की।
सीएम धामी ने कहा कि ब्रह्मगिरी महाराज की मूर्ति स्थापना नई पीढ़ी में आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बनेगी। संत परंपरा वसुधैव कुटुंबकम के भाव से विश्व को जोड़ती है। सनातन धर्म शाश्वत सिद्धांतों पर आधारित है और समय के साथ चलते हुए कभी पराजित नहीं होता। उन्होंने राज्य सरकार की पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू की गई है।
साथ ही सख्त नकल विरोधी कानून, दंगारोधी कानून और धर्मांतरण विरोधी कानून लागू कर युवाओं व समाज की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। नकल विरोधी कानून के प्रभाव से 28 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां मिली हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक उत्थान का उल्लेख करते हुए अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण और बदरीनाथ धाम मास्टर प्लान को ऐतिहासिक कदम बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भारत माता मंदिर को देश की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया और 2027 कुंभ मेले की तैयारियों की जानकारी दी।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और युवा शक्ति देश को विकसित राष्ट्र की ओर ले जा रही है। बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि संतों का सान्निध्य जीवन के दुखों का समाधान है और सनातन संस्कृति ही भारत की पहचान है।
कार्यक्रम में शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम महाराज, योग गुरु बाबा रामदेव, महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद महाराज, विशोखानंद, श्रीमहंत देवानंद सरस्वती, नारायण गिरी महाराज सहित अनेक संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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