देवभूमि के मूल्यों की रक्षा सर्वोपरि: मुख्यमंत्री धामी…

देवभूमि के मूल्यों की रक्षा सर्वोपरि: मुख्यमंत्री धामी…

देहरादून, 03 मई । पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति के स्वर्णिम पुनर्जागरण का काल प्रारंभ हुआ है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माण भारत की आस्था, संस्कृति और स्वाभिमान की पुनर्स्थापना का ऐतिहासिक प्रतीक है।

मुख्यमंत्री सेलाकुई स्थित आद्यशक्ति श्री माता वैष्णो देवी धाम सेवा समिति द्वारा आयोजित मां भगवती जागरण कार्यक्रम में प्रतिभाग कर श्रद्धालुओं के बीच यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने मां भगवती की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक, केदारनाथ पुनर्निर्माण और बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान जैसे कार्य देश में सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल से शुरू हुई चारधाम यात्रा में अब तक तीन लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जो उत्तराखंड के प्रति आस्था को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 से शुरू की गई शीतकालीन यात्रा से धार्मिक पर्यटन को नई गति मिली है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। आदि कैलाश यात्रा को बढ़ावा मिलने और हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना से श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलेंगी तथा सीमांत क्षेत्रों के विकास को भी बल मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण से यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे पर्यटन, व्यापार और तीर्थाटन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास और विरासत दोनों को समान प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है।

पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक पहचान को सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनकल्याण, सांस्कृतिक संरक्षण और संतुलित विकास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।

कार्यक्रम में विधायक सहदेव सिंह पुंडीर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, आयोजन समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

8 thoughts on “देवभूमि के मूल्यों की रक्षा सर्वोपरि: मुख्यमंत्री धामी…

  1. Son günlerde mahalledeki eski binaların yıkım sürecini izlerken ister istemez kendi yaşadığım yerin güvenliğini düşünmeye başladım. Süreç hem çok yavaş ilerliyor hem de insanı biraz geriyor, acaba benzer durumlarla karşılaşanlar nasıl bir yol izledi? [usvrnrqxxzqlaynabt]

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